Friday, August 28, 2009

ओजोन परत के लिए लाफिंग गैस खतरा

नए शोध के मुताबिक नाइट्रस आक्साइड यानी लाफिंग गैस 21 वीं सदी में ओजोन परत के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही है। ग्रीन हाउस गैस क्लोरो फ्लोरो कार्बन [सीएफसी] के उत्सर्जन के कम होने के कारण ऐसा हो रहा है।

अमेरिका के नेशनल ओसनिक एंड एटमास्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन [एनओएए] में केमिकल साइंस डिवीजन के निदेशक ए आर रविशंकर ने बताया, 'ओजोन परत की क्षमता को क्षीण करने में क्लोरो फ्लोरो कार्बस में नाइट्रस आक्साइड का 160वां हिस्सा है, लेकिन ओजोन परत के लिए यह सबसे बड़ा खतरा बन गया है। क्योंकि मांट्रियल प्रोटोकाल से अन्य गैसों के उत्सर्जन में कमी आई है।

'साइंस मैगजीन' में प्रकाशित शोध के मुताबिक, मनुष्यों द्वारा लाफिंग गैस का उत्सर्जन कृषि में उर्वरकों के इस्तेमाल से होता है। ओजोन परत के हानिकारक प्रभाव के बारे में रविशंकर ने कहा, ओजोन की कमी से पृथ्वी पर हानिकारक अल्ट्रावायलेट विकिरण होगा।उन्होंने दावा किया कि लाफिंग गैस वातावरण में इतने बड़े पैमाने पर मौजूद है कि 21 सदी में ओजोन परत के लिए यह सबसे बड़ा खतरा साबित होगी।


डॉ शशांक शर्मा

आगरा


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